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रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

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पृष्ठ 604

प्रसन्नराघव (अङ्क ६।३४) में यह दिखाया गया है कि रावण सीता का वध करना ही चाहता था कि हनुमान् ने रावण के हाथ पर अक्षयकुमार का मस्तक रख दिया। जिसे देखकर वह मूच्छित होकर गिर पड़ा। बाद में सचेत होकर हनुमान् को पकड़ने के लिए सीता को छोड़कर चला गया। यह सब वर्णन चमत्कृति की अभि- व्यक्ति के उद्देश्य से ही है। वाल्मीकिरामायण के अनुसार सीता को प्रलोभन देने के लिए उसने लङ्का का वैभव दिखाया था। परवर्ती रचनाओं में अनेक उपायों का सहारा लिया गया है। उत्तरपुराण के अनुसार मञ्जरिका नाम की रावण-दूती की चर्चा है। गणकचरित में रावण ने मायामय राम और लक्ष्मण की सृष्टि की। रावण चाहता था कि वे राम और लक्ष्मण सीता से अनुरोध करें कि वह रावण को पति मान लें। इतने में हनुमान् ज्योतिषी के रूप में लङ्का में प्रवेश कर गये। बाद में वह भ्रमर बनकर मालिनी के फूलों पर बैठकर मन्दोदरी के महल में पहुँच गये। मन्दोदरी के यहाँ हनुमान् ने बिडाल का रूप धारण कर लिया। मन्दोदरी ने बिडाल को खिलाया। बिडाल उसका माणिक्य छीनकर उसके स्तनों पर नखक्षत कर भाग गया। तब हनुमान् अशोकवन में पहुँचे ! जब मायामय राम रावण से जीवन की भिक्षा माँग रहे थे। रावण को ज्योतिषी के गले में कण्ठमाणिक्य देखकर आश्चर्य हुआ। हनुमान् ने कहा यह माणिक्य एक गन्धर्व से मिला है। जिसका मन्दोदरी से अनुचित सम्बन्ध है। उसने मन्दोदरी के स्तनों में नखक्षत किया है। इसपर रावण ने क्रुद्ध होकर ज्योतिषी को पकड़ लिया और कहा कि यदि तुम्हारा अभियोग सच निकलेगा तो इनाम मिलेगा। अन्यथा तुम्हारा वध होगा। अन्त में हनुमान् का कहा सच निकला। नखक्षत मिल गया ! बाद में हनुमान् सीता के पास आकर उनका समाचार लेकर राम के पास लौटे। रावण के तिरस्कार के कारण विरक्त होकर मन्दोदरी नारायण का स्मरण करती थी। बाद में उसने अपने सतीत्व की शपथ खाकर भूकम्प उत्पन्न किया। सूर्य को रोक लिया। इन्द्र द्वारा पुष्पवृष्टि करा दी। फिर भी रावण का सन्देह दूर न हुआ। मन्दोदरी की अग्निपरीक्षा हुई। अग्नि लगाई गयी, तब- तक दुबरी नाम की स्त्री ने रावण को विश्वास दिलाया कि हनुमान् का अभियोग मिथ्या है। मन्दोदरी ने कहा कि तुमने सीता का अपहरण किया है। इसी लिए हनुमान् ने मेरा अपमान किया है। सीता को लौटाओ। बिहौर जाति की कथाओं में सीता ने रावण के बलप्रयोग से बचने के लिए जादू द्वारा अपने शरीर में भयंकर फोड़े उत्पन्न कर लिए। उक्त अनेक कल्पनाओं में वस्तुस्थितिनिरपेक्ष अपनी अपनी भावनाओं को जोड़ा गया है। इसी प्रकार ५४३ वें अनु० में कहा गया है, वाल्मीकिरामायण (प्रक्षिप्त सर्ग ५८) में जब रावण सीता को मारने उठा तो मन्दोदरी ने उसे रोका। इस वृत्तान्त के आधार पर परवर्ती रचनाओं में रंगनाथरामायण (५।७), धर्मखण्ड (अ० १०५), अध्यात्मरामायण (५।२।३८), आनन्दरामायण (१।९।८४), भावार्थरामायण (५।८) तथा रामचरितमानस (५।१०) के अनुसार भी मन्दोदरी सीतावध को रोकती है। बलरामदासरामायण के अनुसार त्रिजटा रोकती है। काश्मीरीरामायण के अनुसार हरण के बाद ही सीता को मन्दोदरी की देख-रेख में रखा गया था। ५४४ वें अनु० में बुल्के कहते हैं कि प्रामाणिक वाल्मीकिरामायण में रावण-वध के पूर्व मन्दोदरी के हस्तक्षेप का उल्लेख नहीं था। सुन्दरकाण्ड के एक प्रक्षेप, जो तीनों पाठों में मिलता है, के अनुसार मन्दोदरी ने रावण को सीता का वध करने से रोका था। उत्तरपुराण के अनुसार मन्दोदरी ने यह भी याद दिलाया था कि किसी पतिव्रता का स्पर्श करने से तुम्हारी आकाशगामिनी विद्या नष्ट हो जायेगी। उदीच्य पाठ के अनुसार प्रहस्तवध के बाद भी मन्दोदरी ने परामर्श दिया था। राम से युद्ध मत करो, क्योंकि राम मनुष्यमात्र नहीं हैं। पश्चिमोत्तर पाठ के अनुसार यज्ञध्वंस के प्रसङ्ग में मन्दोदरी के केशग्रहण का भी वर्णन है। पीछे कहा जा चुका है कि सुन्दरकाण्ड का ५८ वाँ सर्ग प्रक्षेप नहीं है। बुल्के के अनुसार भी जब वह तीनों पाठों में विद्यमान है और उसपर टीकाकारों ने टीकाएँ की हैं। जो सर्ग परम्पराप्राप्त नहीं उनपर टीकाकारों ने