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रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

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६९४ रामायणमीमांसा विंश को टहलाने ले गयी । बाद में सीता दुःख से द्रवित हो गयी । इस पर वाल्मीकि ने एक बालक की सृष्टि की । सिंहली रामकथा के अनुसार वाल्मीकि ने सीता-पुत्र न देखकर एक कमल से दूसरा बालक बनाया । ऐसी अन्य भी अनेक कल्पनाएँ हैं जो वाल्मीकिरामायण के विरुद्ध होने के कारण कल्पान्तरीय कही जा सकती हैं । वाल्मीकिरामायण में अश्वमेध की यज्ञभूमि में लव और कुश रामायण का गान करते हैं । वहीं राम अपने पुत्रों का परिचय पाते हैं । बहुत सी राम-कथाओं में कुश और लव राम की सेना से भी युद्ध करते हैं । युद्ध का मुख्य कारण यह है कि कुश और लव ने रामाश्वमेध के घोड़े को बाँध लिया था । पउमचरियं (पर्व ९७-१००) के अनुसार लवण तथा अंकुश (लव तथा कुश) - अपनी माता के साथ पुण्डरीकपुर के राजा वज्रजङ्घ के यहाँ रहते हैं एवं सिद्धार्थ से शिक्षा पाते हैं। उनके यहाँ विवाह एवं दिग्विजय के बाद नारद आकर उनकी माता के त्याग की घटना का समाचार सुनाते हैं । इसपर लवण और अंकुश राम तथा लक्ष्मण से प्रतिशोध लेने के लिए सेना लेकर अयोध्या पर आक्रमण कर देते हैं । लवण राम से एवं अंकुश लक्ष्मण से युद्ध करते हैं । युद्ध के अनिश्चित होने पर नारद आकर राम और लक्ष्मण को लवण तथा अंकुश के जन्म का रहस्य बतलाते हैं । इसपर राम अपने पुत्रों से मिल कर उनको पास ही रखते हैं । बाद में सीता की अग्नि-परीक्षा होती है ( पर्व १०२) । हनुमान् पुत्रों का पक्ष लेकर राम के विरुद्ध युद्ध करते हैं । कथासरित्सागर ( ५१) के अनुसार कुश और लव शिवलिङ्ग से खेल खेलते हैं । प्रायश्चित्त के लिए वाल्मीकि लव को कुबेर के सरोवर से स्वर्णकमल तथा वाटिका में मन्दार लाकर शिवपूजन का आदेश करते हैं । लक्ष्मण उस समय राम के पुरुषमेध के लिए शुभलक्षणसम्पन्न पुरुष खोज रहे थे । उन्होंने लव को बन्दी बना लिया । इसपर वाल्मीकि कुश को अयोध्या भेजते हैं । वाल्मीकि के दिव्य अस्त्रों से कुश ने लक्ष्मण और राम को पराजित किया । बाद में राम पुत्रों का परिचय प्राप्त करते हैं और सीता को बुला भेजते हैं । आनन्दरामायण ( जन्मकाण्ड ६।८ ) के अनुसार वाल्मीकि के आश्रम में अपने पुत्रों के साथ रहनेवाली सीता नौ दिन का संयोगकरण व्रत करना चाहती हैं । इसके लिए अयोध्या के सरोवर के स्वर्णकमलों की आवश्यकता पड़ती है । पञ्चवर्षीय लव छिप कर ले आता है । आठवें दिन चौदह पहरे- दारों को परास्त कर उनसे कहता है कि मैं वाल्मीकि के आदेशानुसार यह कमल ले जा रहा हूँ । नवें दिन १००० रक्षकों को पराजित करता है । सीता व्रत पूरा करती है । बाद में शिष्यों सहित वाल्मीकि को रामाश्वमेध का निमन्त्रण आता है । वाल्मीकि सीता तथा शिष्यों सहित आकर सरयूतीर पर ठहरते हैं । इतने में वहाँ यज्ञाश्व पहुँचता है । लव उसे बाँध लेता है तथा राम की समस्त सेना को पराजित करता है । लक्ष्मण लव को पराजित करते हैं । कुश आकर लक्ष्मण को पराजित करता है । फिर देर तक राम कुश का युद्ध होता है । युद्ध में किसी की जीत नहीं होती । राम ने कुश और लव के सम्बन्ध में वाल्मीकि से प्रश्न किया । महर्षि ने कहा—कल इसका रहस्य ज्ञात होगा । दूसरे दिन कुश और लव रामायण का गान कर अपना परिचय देते हैं । पश्चात् सीता को बुलाया जाता है । सतीत्व का साक्ष्य देने के पश्चात् वह राम तथा पुत्रों के साथ अयोध्या में रहने लगती है । भावार्थरामायण ( ७।६६,६७ ) में भी यही वृत्तान्त है । बुल्के की कालकल्पना भारतीय संस्कृतिविरोधी पाश्चात्यों की कल्पना पर ही आधारित है, अतः विश्वसनीय नहीं है । बृहत्कथा तो भवभूति से प्राचीन है ही । उत्तररामचरित अङ्क ५,६ में लव का पहले यज्ञाश्व की रक्षा करनेवाली राम की सेना तथा अन्त में लक्ष्मण-पुत्र चन्द्रकेतु से युद्ध होता है । राम पहुँच कर तथा दोनों का युद्ध रोक कर परिचय प्राप्त करते हैं । अन्त में सीता को ग्रहण करते हैं । रामाश्वमेध के अनुसार लव का भरतपुत्र पुष्कल से युद्ध होता है । जैमिनीयाश्वमेध ( अध्याय २९-३६ ) के अनुसार लव यज्ञाश्व को बाँधकर सैनिकों का वध कर शत्रुघ्न से पराजित होते हैं । कुश शत्रुघ्न को पराजित करते हैं । बाद में कुश और लव दोनों ही लक्ष्मण, हनुमान् तथा भरत पर विजय प्राप्त करते हैं एवं राम को आहत करते हैं । अन्त में वाल्मीकि राम की समस्त सेना को अमृत जल से पुनर्जीवित करते हैं ।