रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)
Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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१४ रामायणमीमांसा प्रथम सब लोग विश्वास के साथ जोर से बोलें— “भगवान् विष्णु का बल प्रवृद्ध हो ।” ( वा० रा० ६।१३०।११८ ) आप नारायण, चतुर्भुज, सनातन-देव हैं । अप्रमेय अव्यय प्रभु राक्षसों को मारने के लिए श्रीरामरूप में उत्पन्न हुए हैं। समय समय पर नष्ट धर्म को व्यवस्थित करने के लिए प्रजाहितार्थ आप प्रकट होते हैं। हे शरणागतवत्सल ! आप दस्यु लोगों के वधार्थ अवतीर्ण होते हैं ( वा० रा० ७।८।२६, २७ ) । तदनन्तर वे भगवान् विष्णु अपने दिव्य-धाम में प्रतिष्ठित हुए, जिसके द्वारा चराचर त्रैलोक्य व्याप्त है । ✽