रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)

रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)
Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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८५० रामायणमीमांसा एकविंश "लखन जानकी सहित प्रभु राजत रुचिर निकेत । सोह मदन मुनि बेष जनु रति ऋतुराज समेत ॥” (रा० मा० २।१३२) स्पष्ट ही है। वस्तुतः जीव, ब्रह्म, माया या विधु, बुध, रोहिणी रूप ही राम, सीता और लक्ष्मण नहीं हैं। इसी तरह मदन, रति और ऋतुराज भी वे नहीं हैं। वस्तुतः रति को तो गोस्वामीजी ने सीता की उपमा के योग्य भी नहीं समझा— “केहि पटतरिय तीय सम सीया। जग अस युवति कहाँ कमनीया ॥ गिरा मुखर तन अरध भवानी। रति अति दुखित अतनु पति जानी ॥ विष वारुनी बंधु प्रिय जेही। कहिय रमा सम किमि वैदेही ॥” (रा० मा० १।२४६।२,३) fleuraron/divider/asterisk