रामायण मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - रामायण दार्शनिक महाग्रन्थ एवं सम्पूर्ण चरित्र-मीमांसा)
Ramayana Mimamsa of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतक एवं अशोक का राजत्वकाल कलि सं० १६५०, वि० पू० १३९६ से २६ वर्षों तक ई० पू० १४२७ तक प्रमाणित होता है । सेण्ड्राकोट्स ऐसी स्थिति में जिस सैण्ड्राकोट्स (चन्द्रगुप्त) का शासनारम्भ विलियम जोन्स आदि विद्वानों ने ई० पू० ३२३ वर्ष के आसपास माना है उसे चन्द्रगुप्त मानना भ्रम है । शिलालेखों के अनुसार मौर्य अशोक का शासनकाल यूनान के पाँच राजाओं के समसामयिक ई० पू० २५८ की कल्पना करना भी साहस ही है। शिलालेखों में पश्चिम- भारतीय राजाओं के यवनादि पञ्च गणराज्यों को यूनान के पाँच राजाओं के नाम पढ़ना भी साहस ही है । श्रीजोन्स आदि विद्वानों के अनुसार यूनानी लेखकों की दृष्टि में पालिबोथ्रा नगरी को पाटलिपुत्र और सैण्ड्रा कोट्स को मौर्य चन्द्रगुप्त का अपभ्रंश माना जाता है। यूनानी इतिहास के आधार पर उसका काल ई० पू० ३२२ है । यह सब सिद्ध किया जाता है मेगस्थनीज की उक्त पुस्तक के आधार पर जिसे उसने पाँच वर्ष तक सेल्यूकस राजा के राजदूत के रूप में सैण्ड्राकोट्स के दरबार में उसकी राजधानी पालिबोथ्रा में रहकर लिखा था और अब वह कहीं नहीं मिलती । उसके कुछ प्रकीर्ण अंश यूनानी इतिहासकारों की पुस्तकों में मिलते हैं। जिनको पाश्चात्य विद्वानों ने एकत्रित किया था जिनका अंग्रेजी अनुवाद वेक साहब ने किया है। पं० रामचन्द्र शुक्ल द्वारा अनूदित मेगस्थनीज का भारतभ्रमण (हिन्दी) में उल्लेख है कि डायनुशस् पश्चिम से आया था। उसी वंश में हेराक्लीज हुआ था जो साधारण मनुष्यों से बल और बुद्धि में बड़ा था। उसने बहुत-सी स्त्रियों से विवाह कर के बहुत से पुत्र उत्पन्न किये और बहुत से नगर बसाये, जिनमें सबसे बड़ा पालिबोथ्रा है । मेगस्थनीज की पुस्तक का जो अवतरण ओरायन ने दिया है उसमें हेराक्लीज से सैण्ड्राकोट्स तक १३६ पीढ़ियाँ दी हैं। देखो महाभारतमीमांसा (पृ० ९१ प्रकरण ४)। इससे यह सिद्ध होता है कि सैण्ड्राकोट्स से १३८ पीढ़ी पहले पालिबोथ्रा नगरी बसी थी। इतिहासविशारद प्लायनी के अनुसार पालिबोथ्रा नगर गङ्गा और ईरानाबोअस के सङ्गम से २०० मील ऊपर की ओर स्थित है। प्लायनी फ्रैगमेन्ट्स आफ इण्डिया (पृ० १३०)। एम० डी० आनविल्ले के अनुसार ईरानाबोअस यमुना नदी है । इससे गङ्गा और यमुना के सङ्गम से २०० मील ऊपर पालिबोथ्रा का होना सिद्ध होता है। प्लायनी फ्रैगमेंट्स आफ इण्डिया (पृ० १३०) । जोन्स के वक्तव्य में ओरायन के मत से गङ्गा और ईरानाबोअस का सङ्गम प्रसई (प्रस्सी) जनपद में था। कर्टियस का मत है कि मेगस्थनीज का पालिबोथ्रा प्रभद्रक या पारिभद्रक जनपद में है। इस तरह यदि प्रति पीढ़ी बीस वर्ष का समय मानें तो सैण्ड्राकोट्स द्वारा २७६० वर्ष पूर्व पालिबोथ्रा का बसाया जाना सिद्ध होता है। इधर वायुपुराण के अनुसार पाटलिपुत्र नगर शिशुनाक-वंश के आठवें राजा उदायी ने अपने अभिषेक से चौथे वर्ष में बसाया था— “उदायी भविता तस्मात् त्रयस्त्रिशत् समा नृपः । स वै पुरवरं राजा पृथिव्यां कुसुमाह्वयम् ॥ गङ्गाया दक्षिणे कूले चतुर्थेऽब्दे करिष्यति ।।” (वायु० पृ० ९९।३१८, ३१९) दर्शक का पुत्र उदायी ३३ वर्ष तक राज्य करेगा । वह अपने अभिषेक से चौथे वर्ष में गङ्गा के तट पर कुसुम नामक नगर बसायेगा । ब्रह्माण्डपुराण उपोद्घात ३ पा० १३२ श्लोक में भी उदायी का अभिषेक कलि सं० १३८५, विक्रम पूर्व १६५७, ई० पू० १७१६ से चौथे वर्ष ई० पू० १७१३ के कुसुमपुर बसाया गया । जैनपुस्तक 'पटवन' में भी पाटलिपुत्र को शिशु नामक वंश में आठवें राजा ने बसाया लिखा है। परन्तु पालिभाषा के बौद्ध ग्रन्थ महामग्ग सुत्तनिपात में लिखा है कि शिशुनामक वंश में छठे राजा अजातशत्रु ने कुसुमपुर बसाया। देखो भारत के प्राचीन नगर पुस्तक पृष्ठ ३२ । कुसुमपुर, पुष्पपुर, पाटलिग्राम, पाटलिपुत्र, पाटलिनगरी ये सब पर्यायवाची शब्द हैं ।