झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१०४ झांसी की रानी छोटी रियासतो को किसी न किसी बहाने घोट-घाटकर बडी रियासतों को चुप रहने का सबक सिखाया जावे । सबसे बडा काम जो अङ्गरेज़ो ने हिन्दुस्थानी जनता की भलाई (!) के लिये किया, वह था पञ्चायतो का सर्वनाश । अङ्गरेजो को इस बात के परखने में बिलकुल विलम्ब नही हुआ कि उनके कानून के सामने हिन्दुस्थान की आत्मा का सिर तभी झुकेगा जब यहाँ की पञ्चायते विलीन हो जायेंगी, और हिन्दुस्थानी, अर्जियाँ लिये उनकी बनाई हुई साहबी अदालतो के सामने मुह बाये भटकते फिरेंगे । यह सब उन्नीसवी शताब्दि के वैज्ञानिक ढङ्ग से हुआ । जो परिस्थिति कठोर से कठोर पठान या मुगल नरेश अपने प्रकट अत्याचारो से उत्पन्न नही कर पाये थे, वह अङ्गरेजो ने अपनी वैज्ञानिक हिकमत से उत्पन्न कर दी । बडे-बड़े राजा-महाराजा और नवाब अपनी जनता का दामन छोड कर अङ्गरेजो का मुँह ताकने लगे । पुरुषार्थ की जरूरत न थी, इसलिये सिर डुबोकर विलासिता के पोखरो में घुस पडे । अङ्गरेजी बन्दूक और सङ्गीन उनकी पीठ पर थी, जनता की परवाह ही क्या की जाती ? अङ्गरेजो को केवल एक बात का खटका था—उनके इलाको के हिन्दू और मुसलमान धर्म के इतने ढकोसले क्यो मानते हैं ? किसी दिन इन ढकोसलो की श्रद्धा में होकर हमें नफरत की निगाह से न देखने लगें ? इस धर्म से लिपटी हुई आत्मा का कैसे उद्धार कर के अपना भक्त बनाया जावे ? बस इनकी रूहानी भक्ति मिली कि हिन्दुस्थान मे अपना राज्य अमर और अक्षय हो गया । इसलिये सरकारी पाठशालाओ में बाइबिल की शिक्षा अनिवार्य कर दी गई। एमेरिका हाथ से निकल गया तो क्या हुआ ? सोने की चिडिया, सोने के अण्डे देने वाली मुर्गी—भारतभूमि—तो हाथ में आई ! यह न जाने पावे किसी तरह भी हाथ से ! मदिरो की मूर्तियां मत तोड़ो, मसजिदों को अपवित्र मत करो—परन्तु धर्म पर से श्रद्धा को हटा दो, फल उससे भी कही बढ़कर होगा । और कोने कोने में ढोंढी पीट दो कि हम धर्मों के