झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
DevanagariHindipublished526 पृष्ठ
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लक्ष्मीबाई १०६ और उसने नीचा सिर करके अपनी कलाहियो पर उँगलियो से कडो के वृत्त बनाये । राजा ने हँसकर कहा, 'सोने के कडे मिलेगे और सिरोपाव भी । जा तोपो की सलामी छुटवा । पर देख, बडी तोपें न छूटे । हल्ला बहुत करती हैं । और बस्ती के पञ्चो और भले आदमियो को सूचना दे ।' गार्डन भी बहस से छुटकारा पाकर अपने घर चला गया । गवर्नर जनरल को सूचना दे दी गई । झासी राज्य को अङ्गरेजी इलाके में मिला लेने की घडी टल गई ।