भारतकोश
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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पृष्ठ 155

१४४ झांसी की रानी भोलेपन के साथ एलिस बोला, 'मुझको मालूम नही नवाब साहब, पर अगर ऐसा हो तो यहा की जनता सरकारी हुकूमत और कानून पसन्द करेगी ?' अलीबहादुर ने बडे मीठे स्वर मे जवाब दिया, 'दोनो हाथो से जनाब । स्वर्गीय राजा साहब के जमाने में जो जुल्म हुये हैं उनको आसानी से नही भुलाया जा सकता ।' एलिस सचाई का ढोंग करते हुये बोला, 'कुछ मैंने भी सुने हैं जैसे साधारण से अपराधो पर लोगो को बिच्छुओ से कटवाना । लेकिन, मरने के करीब के जमाने की कोई शिकायत मेरे कान तक नही आई ।' एलिस नवाब साहब जैसे हिन्दुस्थानियो की आतो तले से बात को निकालने का केंडा जानता था । उनकी ओर देखने लगा । नवाब ने कहा, 'छोटी छोटी सी बातो का आपके सामने बयान करना आपकी शान के खिलाफ होगा । पहले के किये हुये कुछ अन्धेरे इतने गजब के हैं कि सताये हुये लोग अब तक तडप रहे हैं ।' 'मुझको ऐसे लोगो के नाम और उन पर बीती हुई याद नही नवाब साहब ।' उत्सुकता प्रकट न करते हुये एलिस बोला 'कमसे कम एक ही की बीती हुई सुनें जनाब' नवाब ने कहा, 'नाम बिचारे का खुदाबख्श है पहले उसको राजा साहब बहुत अङ्ग लगाये रहते थे । नाटकशाल में बराबरी से बिठलाते थे । छोटी सी जागीर भी दिये हुये थे । एक दिन सनक जो सवार हुई तो गरीब को देश निकाले की सजा देदी । जागीर जब्त करली । उसने अर्ज मारूज पेश करने की बरसो कोशिश की, मगर उसको मोका तक नही दिया गया ।' 'उसने कम्पनी सरकार में कोई अर्जी दी ?' एलिस ने पूछा । नवाब ने माथा टटोल कर उत्तर दिया, 'याद नही पडता । शायद नही दी ।' अङ्गरेज ऐसे मौको पर अपनी धाक जमाते हैं ।