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झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

पृष्ठ 161, कुल 526 में से

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१५० झांसी की रानी 'गोद के मनवाबे के लाने अर्जी । जो कैसो अन्देर राम । हम अपने गावन मे रोजई गोद लेत देत, पै ईके लाने अर्जी पुर्जी तो कोऊ नई देत ।' 'अङ्गरेजन ने नये नये कानून निकारे हैं ।' 'तो का ऐसे कानून चल जैहैं ?' ' बे तौ बात बात पै कानून बरसाउत । अर्जी दो, 'टिकट लगाओ, पंचायतन खौ चूल्हे में डारौ । गोरन के बगलन पै मारे मारे फिरौ, हाजरी देओ...।' 'इतनो खाओ और इतनो सोओ - अबका ईके लाने सोऊ अङ्गरेज कानून बनाये ?' 'अक्ल चेथरी* में चढ गई सो अब उने कछू सूझत नईया ।' 'तौका ऐसी आखे फट गई धरम-करम कछू नही लेखत ?' 'वे धरम-करम का चीन्हे ? बौ तौ हिन्दू-मुसलमान केई बाटे परो है।' इस आत्मश्लाघा के बाद दूकानदार ने ग्राहको को चलाया । भीड बढ गई थी । सौदा मजे मे चल रहा था । दूकानदार बात करना चाहता था और देहाती सुनना और गुनना चाहते थे । 'ऐहो सो अङ्गरेज की जा अन्दाधुन्धी चल जैहै ? हम तुम का मानसई नईया ?' 'अङ्गरेजन की छाउनियन मे गउयें कट रईं हैं । कानून कौ ऐसौ डडा घलरओ कै सब जने सास लैवे में उकतान लगे ।' 'कितै जू ?' 'सब जागा । ग्वालियर रियासत तौ है, पै उतै अङ्गरेजन की चालौ चल रओ । उतै कौ बडौ साब जब बजार में होके निकरत तब सब बजार बारन खो उठ उठ कै झुक झुक कै राम सलाम करने परत ।' 'जौ बडो साब को आय ? ऐसै राम राम तौ राजन खौ करी जात ।' 'बडो साब लाट साब कौ नौकर है ।' *चेथ - मस्तक का सबसे ऊपरी भाग ।

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