भारतकोश
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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१५२ झांसी की रानी झलकारी, इन अङ्गरेजन मे चलन दूसरी तरा को सुनत।' 'हुइये आगलंगन के। मोरे मन में तो आउत कै पनैया उतार कै मूंछन बरेके मोपें चटाचट दैंग्रो।' 'कायरी ऊनै तोरो का लै लङ्ग्रो ?' 'हमाग्रो कछू लैवे खो आय तब पसुरिया टोर कै धर दैंग्रो, पै वैना का इन गोरन खौं जानती नइँया ? झाँसी खौं गुटकन चाउत।' 'हमाई रानी न गुटकन दे। 'ए, रानी का है छाच्छार* दुर्गा है। ऐसी प्यारी लगत। मोये तो ऊदिना हरदी कूँ कूँ में गरे से लगा लयो तो। मैं तो ऊपै अपने प्रान दै सकत।' 'और तौरो मुस का कर है ?' 'काये अब गारियन पै आ गई ? मै हूँसा दैंग्रो, सो सबरो बुकलयावो बिसर जै। जब रानी पै कौनउ आफत आजैं, तब का लुगाई और का मानस, सब अपने खौं हौम देये।' पीरअली और खुदाबख्श ने पान वाले की दूकान पर सुना — 'यह छोटा साहब कैसी अकड के साथ बाजार मे होकर निकलता है!' 'इस समय इन लोगो का सितारा चमका है। कभी डूबेगा भी।' 'इनकी तकदीर तो देखो। जो सामने आया समेट लिया गया। हैं हिम्मत वाले।' 'जी हा ! हिम्मत के सब हरफ खुदा ने इन्ही के खोपडे पर लिख दिये हैं। हमारी फूट ने हमे खालिया। नही तो क्या मुगल, पठान, राज पूत, मराठा वगैरह के होते ये एक घडी भी हिन्दुस्थान में ठहर सकते थे ?' 'बनिये बनकर आये और ठाकुर बनकर जम रहे हैं।' 'इन राजो नवाबो ने चौपट किया।' 'प्रजा को कष्ट दिये। सिपाही लडाई में हारे, और राज्य गया।' 'अजी सब जनाने हो गये।' *छाच्छार = साक्षात ।