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झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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१५४ झांसी की रानी झम्मीसिंह ने कहा, 'खूब कई साब तुमने, स्याबास । अँगरेजन की जासूस सौ का हती ?' तम्बोली बोला, 'हुइये । का करनै कक्का ।' भग्गी दाऊजू ने कहा, 'झांसी लटी तकै तिहि खाये कालका माई ।'* 'वा दाऊजू वा,' तम्बोली बोला, 'कविराजई तो ठैरे ।' झांसी मे उस समय अनेक लावनी बाज थे । उनकी कविताये पिंगल के नियमो मे परे होती थी, लेकिन थी वे बहुत लोक प्रिय । भग्गी दाउजु उन्ही में से एक था । पीरअली ने बाज़ार का सारा समाचार अलीबहादुर को दिया । अलीबहादुर ने दूसरे दिन एलिस को सुनाया । एलिस ने नवाब साहब को धन्यवाद दिया और मन में कहा, 'आल बाजार गौसिप' ( सब बाजार की गपशप ) । *भग्गी दाऊजू का रायसा — परिशिष्ट में देखिये ।