झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
पृष्ठ 169, कुल 526 में से
संदर्भ में पढ़ें१५८ झाँसी की रानी डलहौजी ने झाँसी की मिसिल पर २७ फरवरी सन् १८५४ को हुकुम चढ़ाया:— 'झाँसी राज्य पेशवा का आश्रित राज्य था । १८०४ की सन्धि में शिवराव भाऊ ने इस बात को कबूल किया था । हमको ऐसे आश्रित राज्यो में गोद मानने न मानने का अधिकार है । रामचन्द्रराव ने १८३५ मे, जिसको हमने ही सन् १८३२ मे राजा की उपाधि दी थी, मरने से एक दिन पहले किसी को गोद लिया था । वह गोद ब्रिटिश सरकार ने नही मानी थी । हम दामोदरराव की गोद को मानने के लिये बाध्य नही हैं । इसलिये झाँसी राज्य खालसा किया जाता है, और अङ्गरेजी राज्य में मिलाया जाता है । पोलोटिकल एजेट की सिफारिस के अनुसार रानी को मासिक वृत्ति दी जायगी ।' इस हुक्म को कानूनी लिवास ७ मार्च सन् १८५४ को मिल गया । मालकम के पास डलहौजी की आज्ञा आ गई और उसने बिना विलम्ब नीचे लिखा हुआ इश्तिहार एलिस के पास भेज दिया — 'दत्तक को गवर्नर जनरल ने नामन्जूर किया है । इसलिये भारत सरकार की ७ मार्च सन् १८५४ की आज्ञा के अनुसार झाँसी का राज्य ब्रिटिश इलाके में मिलाया जाता है । इस इश्तिहार के जरिये सब लोगो को सूचना दी जाती है कि सम्प्रति झासी प्रदेश का शासन मेजर एलिस के आधीन किया जाता है । इस प्रदेश की सब प्रजा अपने को ब्रिटिश सरकार के अधीन समझे और मेजर एलिस को कर दिया करे और सुख तथा सन्तोष के साथ जीवन निर्वाह करे । १३-३-१८५४ ह० मालकम ।' प्रजा का सुख-सन्तोष ! उसका कल्याण !! राजनीति के पाखण्ड को कैसे बढ़िया मुहाविरे मिले !!!