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झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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१७० झांसी की रानी उस मेम्बर ने अन्तरराष्ट्रीय कानून के न्याय की भी दुहाई दी। उस मेम्बर के वाक्चातुर्य की तारीफ हुई और बुद्धि की निन्दा। दूसरी अगस्त सन् १८५४ को अपनी सब पूर्व प्रतिज्ञाओ का विस्मरण करके ब्रिटिश सरकार ने झासी राज्य को 'अग्रेजी इलाके' में मिला लेने की मुहर लगा दी। गवर्नर जनरल की, की हुई काररवाई मन्जूर कर ली गई। चुक्खी चौधरी मगन गन्धी, लाला श्याम, झम्मी और भग्गी दाउजू पूरन कोरी और छन्दी चमार इत्यादि सब अपनी विगत स्वतंत्रता की ओर हसरत भरी निगाहो से देखते रह गये। झलकारी कोरिन के वस्त्राभूषणो, की चटक चली गई।