भारतकोश
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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लक्ष्मीबाई १७१ [ ३५ ] अङ्गरेजी क्लब घर के सामने वाले मैदान की दूबा साफ कराई जा रही थी। धूप में मजदूर हाँफ हाँफ कर काम कर रहे थे । मजदूरो का मुखिया खडे खडे काम का ढग बतला रहा था । एलिस चाहता था काम ज्यादा जल्दी हो । सन्ध्या के पहले ही कमिश्नर स्कीन, डिप्टी-कमिश्नर गार्डन और फौजी अफसर कप्तान डनलप इत्यादि की बैठक होनी थी । कुछ फल-फलारी की भी योजना थी । झाँसी को कमिश्नरी शासन का गौरव प्राप्त हुआ । इसमें कई जिले शामिल कर दिये गये । झाँसी का एक अलग जिला बना । इस झाँसी जिले का पहला डिप्टी-कमिश्नर कप्तान गार्डन हुआ, जो गंगाधरराव को चिरौरी किया करता था । मैदान की सफाई करने वाले मजदूर जरा ढीले पड पड जा रहे थे । एलिस को क्षोभ हुआ । उसने मजदूरो के मुखिया को डांटा । मुखिया ने कहा 'ये मुफ्तखोर हैं हुजूर । डर के मारे मैंने अभी तक इनकी मारपीट नही की । अब हड्डी-पसली तोडता हू ।' एलिस बोला, 'मैं इस समय हड्डी-पसली तोडना पसन्द नही करता, मगर इनसे काम लो । काफी पैसा दिया जाता है । जब रियासत थी तब तो इनको मुफ्त में काम करना पडता था ।' एलिस बगले में चला गया । मुखिया ने सोचा, 'रियासत में काम मुफ्त में करते थे तो रियायते भी बहुत पाये हुये थे । लडकी-लडके के व्याह के समय, देखें अब कौन इन लोगो की मदद करता है ।' चिल्लाकर मजदूरो को काम करने के लिये सम्बोधन करने लगा । पास जाकर उसने कहा 'अब, रियासत नही है अङ्गरेजी सरकार उठी है । ठिकाने से काम करो नही तो खाल टूटती फिरेगी ।' मजदूरो ने कुडकुडाते हुये कहा— 'न हमें रियासत जागीर लगाये थी और न अङ्गरेज लगा देंगे ।' 'जितना खोदेंगे उतना पी पायेंगे ।'