झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंलक्ष्मीबाई १७३
एलिस—'ओ यह पूर्व है । जनता में मानो जान ही नही । मध्यम वर्ग यहा नाम मात्र को भी नही है । राजा जनता के भेडिया धसान को डंडे के सिरे से हाकते रहते हैं।' डनलप—'हमारा शासन उनको कानून और न्याय देगा। व्यवस्थित शासन में ये लोग समृद्ध और सुखी होगे । स्कीन—'यहाँ के बडे लोगो को अपने पास बुलाते रहना चाहिये । वे लोग जन समाज के मुखिया हैं। इनको हाथ मे रखने से शासन में विघ्न बाधा उपस्थित न होगी और जिन लोगो के मन में रियासत की भावनाओ का पक्षपात होगा, वे भी बिलकुल ढल जावेगे ।' गार्डन—'ठीक है। हम लोग उनको जागीरे नही दे सकते। लेकिन , उपाधिया दे सकते हैं। वे उपाधियो को काफी बडा पुरस्कार समझेगे ।' स्कीन—'अलीबहादुर नवाब यहा का बडा आदमी है। विश्वसनी है मुझसे मिला है। बहुत शिष्ट है। उसको बराबर मुलाकात देना चाहिये ।' एलिस—'मैने चार्ज हवाला करते समय गार्डन को समझा दिया है। नवाब अलीबहादुर अपनी पेन्शन बढवाना चाहता है। यह नही हो सकता । उससे साफ कहना होगा, मगर उसको नवाब की उपाधि आजीवन दी जा सकती है।' गॉर्डन—'मैंने उसकी हवेली वापिस करदी है। वह बहुत कृतज्ञ है।' स्कीन—'ठीक किया। अगर उसके कोई लडका हो तो तहसीलदार बना दिया जावे।' एलिस—'लडका तो है, किन्तु वह उसमे नौकरी नही कराना चाहता ।' स्कीन—'क्यो ? हमारे तहसीलदारो को बहुत अख्तियार हैं। हम तहसीलदारो को कुर्सी देते हैं। उनको जूता पहिने दफ्तर में आने देते हैं।' गार्डन—'हा इस बात में काले आदमी बडा गौरव देखते हैं।' स्कीन—'बनियो महाजनो को भी बुलाना चाहिये । इन लोगो के ब्याज का जनता पर बहुत असर चलता है। व्योपार और रोजगार का