झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंझाँसी की रानी १७६ एलिस खडे होकर बोला, 'हमने अपना काम कप्तान गार्डन साहव बहादुर को सौप दिया है। कमिश्नर साहव वहादुर अभी हम लोगो को हुक्म दे गये हैं कि आप लोगो की और प्रजा की भलाई पर खूब ध्यान दिया जाय। आप लोगो की कुशल क्षेम हम लोगो की चिन्ता का दिन रात कारण रहेगा। खूब बेखटके रोज़गार करिये। वहा से बम्बई तक अमन चैन कायम है। चोर उचक्को को कुचलने के लिये हमारे हाथ मे बहुत बडी ताकत है। आप अपने अपने धर्म का पालन, दूसरो को नुकसान पहुचाये वगैर, चाहे जैसा करिये। हमको उससे कोई सरोकार नही। हालाकि हम समझते हैं कि हमारा ईसाई धर्म सर्वश्रेष्ठ है। बहुत जल्दी मदरसे खोले जायँगे। आपकी भाषा के साथ साथ अङ्गरेजी भी पढ़ाई जावेगी, जिससे आप लोगो की सतान विलायत की अच्छी बातो को भी जान सके। अच्छे पढे लिखे हिन्दुस्थानियो को, बडी बडी नौकरिया दी जावेगी, जिससे आप लोग शासन में हाथ वटा सके। अदालते कायम कर दी गई हैं। सब लोग बिना सकोच के इन अदालतो में अपनी फरियाद पेश कर सकते हैं। न्याय किया जावेगा। किसी के साथ रियायत न की जावेगी। अपराधियो को जो दड दिये जावेगे वे कठोर होते हुये भी अमानुपिक नही होगे—किसी का भी हाथ पैर नहीं कटवाया जा सकेगा, किसी को भी बिच्छुओ से नही कटवाया जा सकेगा। आप लोग सुखी हो, हम अग्रेज केवल यही चाहते हैं। आप लोगो में से किसी को कुछ कहना हो, तो कह सकते हैं।' एलिस बैठ गया। झासी के उपस्थित लोग एक दूसरे का मुँह ताकने लगे। एक साहूकार मगन गन्धी बोला, 'हुज़ूर से हमको केवल एक विनती करनी है। हमारे देश में पहले कभी गाय नही काटी गई। मुसलमान बादशाहो ने भी कभी इस बात को नही होने दिया। आपकी अमलदारी होते ही इसका आरम्भ हो गया। इसको बन्द कर देना चाहिये, आप शक्तिशाली हैं।'