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झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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पृष्ठ 188

लक्ष्मीबाई १७७ एलिस ने बैठे बैठे ही कहा, 'आपकी बस्ती में तो यह जानवर नहीं काटा जाता—सिर्फ छावनी में खाने वालो के लिए विवश होकर ऐसा किया जाता है।' मगन गन्धी बैठ गया। उसने अपनी आँख का एक आँसू पोछा। एलिस ने धीरे से गार्डन से कहा, 'ए सैन्टीमैन्टल फूल (एक भावुक मूर्ख।)' अलीबहादुर ने एलिस और गार्डन की ओर ताका, जैसे कुछ कहना चाहते हो। उन्होने अनुमत दी। अलीबहादुर बोले, 'हम लोग परमात्मा को धन्यवाद देते हैं, कि महान कम्पनी सरकार का राज्य हो गया है। हमारे हाकिम बहुत नेक हैं। शहर और इलाके का बहुत अच्छा, बेमिसाल बन्दोबस्त कर रहे हैं। सब लोग चैन से अपने घर सोते हैं। चोर, उठाईगीरे लापता हो गए हैं। किसी को कोई कष्ट नही। अब मदरसे और पाठशालाये खुलेगी। सारा देश झकाझक हो जावेगा। आप लोगो का 'व्योपार बढेगा और आप मालामाल हो जावेंगे।' अलीबहादुर बैठ गये। पीछे की कुर्सी पर बैठा हुआ एक सेठ हँसना चाहता था,. परन्तु उसकी हसी मुस्कराहट में परिवर्तित होगई। एलिस और गार्डन ने देख लिया। गार्डन ने दरबार को समाप्त करने के लिए धीरे से अनुरोध किया। एलिस ने दरबार समाप्त किया। वह 'पूर्वीय दरबार' इत्रपान की अनुपस्थिति से विशिष्ठ था। सेठ- साहूकार कोरे कोरे, फीके घर लौट लौट आए। सब लोगो के चले जाने पर एलिस ने गार्डन से कहा. स्क्रीन की मार्फत आज की कारवाई की सूचना लैफ्टिनेट गवर्नर के पास आगरा भेज देना।' 'अलीबहादुर चतुर और प्रभावशाली आदमी है। इसको हाथ में रखना। ठाकुर मुश्किल मे दबेगे. परन्तु उनको दबाना है अवश्य। यदि