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झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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लक्ष्मीबाई १७६ [ ३६ ] कप्तान गार्डन डिप्टी-कमिश्नर बहादुर का 'बन्दोवस्त' 'बहादुरी' के साथ चला । जागीरे ज़ब्त हुईं, ज़िमीदारियाँ कम हुईं । मन्दिरो को सेवा-पूजा के लिये जो जायदादे लगी थी वे खत्म हुईं । पुजारियो को, पूजको को यह बहुत अखरा । अर्जी-पुर्जिया कीं । बगलो पर माथे रगडे एक न चली । गार्डन की दृढ़ता ने चोर-डाकुओ से लेकर पुजारियो तक के होश ठिकाने लगा दिये । हर बात में अर्जी और अर्जीनवीस का दौरदौरा बढ गया । कानून की प्रतिष्ठा के, लिये वकीलो को आदर मिला । पहले कोई परीक्षा इस पेशे के लिये जारी नही की गई थी । वकालत की सनद डिप्टी-कमिश्नर 'अता' किया करता था—ठीक उसी तरह जैसे जिमीदारी या नौकरी 'अता' होती थी । होशियार लोगो ने झटपट अङ्गरेज़ी कानून, अदब, ढग सीखा और आगे चलकर बिना उसके अदालत का पत्ता भी न हिला । इस वर्ग ने उस युग में सब प्रकार की निष्ठाओ के ऊपर कानून की निष्ठा को बिठलाने में जाने-अनजाने सहायता की । केवल यह एक ऐसा अङ्गरेज़ी सस्कार है जिसके प्रति हिन्दुस्थानियो की आत्मगत भावनाओ में श्रद्धा होनी चाहिये थी, परन्तु जिस प्रेरणा और जिस वातावरण में होकर और जिन उपकरणो के साथ न्याय का यह साधन आया था, वे सब हिन्दुस्थानियो को कतई अच्छे नही लगे और इसीलिये कानून भी अखरा । परोपकार की वृत्ति से प्रेरित होकर अंगरेजो ने कानून की प्राण प्रतिष्ठा हिन्दुस्थान के न्याय-मन्दिर में की हो सो बात नही थी । देश में पूर्ण शांति हो, अगरेजो का अधिकार सदा-सर्वदा इस देश में बना रहे और अगरेजी व्यापार, व्यवसाय निर्वाध चलते रहे, बस इसी वृत्ति से प्रेरित होकर कानून बनाये गये और चलाये गये । गवर्नर जनरल से लेकर पटवारी और चौकीदार तक कायदा-कानून मे बँधकर अपना अपना काम करते चले जाय, अनुशासन में शिथिलता न आने

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