झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंलक्ष्मीबाई १८५ ' वे लगन के साथ सब क्रियाये सीखें। अपनी पुरानी बारगी युद्ध परिपाटी* को तो गाठ ही मे बाध लो। हमारा देश उस परिपाटी को छोडकर अङ्गरेजो से लडा, इसलिये भी हारा।' तात्या—मैने नाना साहब और रावसाहब के प्रोत्साहन और आज्ञा से इन सब बातो का ध्यान रक्खा है और आपकी भी आज्ञा मिली। पूरा ध्यान दूंगा। में इतने महीनो पैदल अधिक फिरा हू इसलिये मुझको देश का भूगोल बहुत अच्छी तरह याद हो गया है। किसी न किसी तरह बहुत से आदमी, सामान और जानवर लेकर कही का कही पहुँच सकता हूँ।' रानी—'लड़ाइयो के नकशो का अध्ययन किया ?' तात्या—'अच्छी तरह। पञ्जाब मे जो लड़ाइया अङ्गरेजो से सिक्ख लडे हैं उनका भी मैने अध्ययन किया। व्यर्थ ही सिक्खो ने इतनी वीरता खर्च की। इतनी युद्ध सामग्री, ऐसी अच्छी सीखी-सिखाई फौज यदि अच्छे नायको के हाथ मे होती तो अङ्गरेज सिक्खो को कभी न हरा पाते। परन्तु कदाचित् उनकी हार देश-द्रोहियो के कारण हुई है।' रानी—'वे लोग कहते होगे कि भाग्य ने हरा दिया ?' तात्या—निरसन्देह यही कहते हैं।' रानी—'पञ्जाब में स्त्रियो को कुछ स्वाधीनता है ?' तात्या—'हिन्दू और सिक्ख स्त्रियो को है।' रानी—'तब पञ्जाब किसी दिन फिर खडा होगा।' तात्या—'परन्तु मुसलमान स्त्रियो में कम है।' रानी—'यह खेद की बात है, किन्तु वे भी किसी दिन अपनी बहिनो के प्रभाव में आवेगी।' तात्या—'मै पञ्जाब को भी अपनी योजना में ले रहा हू। जिस समय इस ओर की बाढ पञ्जाब से जोट करावेगी, उस समय पञ्जाब भी नीचे पडा न रह सकेगा।' Guirella warfare.