झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
DevanagariHindipublished526 पृष्ठ
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१६८ झांसी की रानी उठती थी, परन्तु उनकी रोती हुई, बेबस सूरतो को देख देखकर सहम जाता था । अन्त में आत्मघात का निश्चय उसके मन के किसी कोने में जाकर लीन हो गया । बख्शिशअली फिर यथावत् काम करने लगा । जब कभी स्कीन या गार्डन जेल—निरीक्षण के लिये आता, बख्शिशअली को ऐसा लगता मानो कोई जल्लाद आया हो ।