झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
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२३८ झाँसी की रानी ही हो । वे बुरा मान जायंगे । शायद रानी साहब बुरा मान जावें । मैं रानी साहब को अपना देवी देवता समझती हूँ ।' 'मैं मूर्ख नही हू । इस तरह न कहूँगी कि वे समझे तुमने कोई शिकायत की है । तुम्हारा काम व्योरेवार बतलाऊँगी । खुश होगे और तुमसे मिलेगे ।' 'कर्नल साहब की हवेली पर ?' मोतीबाई—'फिर कहा ? तुम्हारे मकान पर ?' जूही—'आपके मकान पर आ जाऊँगी ।' मोतीबाई—'देखू गी, वे जहा उचित समझे ।'