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झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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लक्ष्मीबाई २३३ और बारूद बनाने वाले कारीगर, हाथ में हो गये हैं, क्यों कि उपद्रव होते ही अङ्गरेज लोग अपना सामान नष्ट कर देगे। और फिर हम खाली तोपों से कोई काम नही कर सकेंगे।' तात्या—'प्रबन्ध कर लिया है।' रानी—'हमको ऐसी तोपे चाहनी पडे गी, जो चलते समय धक्का न दें और जल्दी गर्म न हो जावे।' तात्या—'इस प्रकार के कारीगरो को बराबर खोजा है। कुछ मिले भी हैं। खबर लगी है कि झासी में इस चतुराई वाले कारीगर हैं।' रानी—'हां हैं, मैंने कुछ इकट्ठे किये हैं। ऐसी बारूद बनाने वाले भी मैंने ढूँढे हैं, जो धुआं बहुत कम दे।' नाना—'अब ज्यादा विलम्ब नही किया जावेगा।' रानी कितने दिन और लगेगे ?' नाना—कुछ महीनो से अधिक नही।' रानी—'मेरी सम्मति में, अभी जरा और संयम और अनुशासन की आवश्यकता है।' तात्या—मैं बिलकुल मानता हूँ बाईसाहब ! परन्तु ऐसा जान पडता है कि विस्फोट जल्दी होगा। अङ्गरेज लोग हिन्दू-मुसलमान सिपाहियो को ईसाई बनाना चाहते हैं। फौज की सही हालत जानने के लिये, मैं अनेक साधन काम में ला रहा हूँ। उन सबसे एकसा ही समाचार मिल रहा है। अङ्गरेज कर्नल और कप्तान पादरी बने हुये हैं। अपने छापे की, कलो मे सहस्रो लाखो की सख्या में, छोटी बडी पुस्तके छप छाप कर, फौज में वाट रहे हैं। जिनमें हिन्दू-और मुसलमानो के धर्मों की, बेहद निन्दा की जाती है। इसके ऊपर सिपाहियो को भाति भाति के प्रलोभन, देकर, ईसाई बनाने की कोशिश की जा रही है। चर्बी वाले कारतूस अब भी, बन रहे हैं। पहले मैं समझता था कि बन्द कर दिये गये हैं। और चर्बी वाली बात बहुत बढा बढा कर फैलाई गई है। पर अब तो निश्चय हो गया है कि बात सच्ची है सिपाहियो को यह सब बहुत अधिक खटक रहा है।