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झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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पृष्ठ 253

२४२ झाँसी की रानी 'यह डनलप असल में अपने और अपने अङ्गरेज भाइयो के सिवाय किसी को खुदा का बेटा नही मानता।' 'हाय न जाने वह दिन कब आवेगा!' 'बहुत दिनो अपने ही भाइयो से लडे और इन लोगो के बहकाने से उनको तबाह किया।' 'कहते हैं हमारा निमक खाते हो, निमक की बजाना--हम कहते हैं निमक तुम्हारे वाप का है?' 'बेशक है। ये लोग अगर कुर्सीनामे में से सावित करदे कि ये खुदा के नाती पोते पन्ती वन्ती कुछ हैं तो बेशक है।' 'यह तो हम लोग सावित कर सकते हैं क्योकि हम उसकी पूजा करते हैं, उसके कदमो में नमाज़ कहते हैं, लेकिन ये लोग—मौका मिला और शराब गटकी, क्लब घर में पहुचे और नाचे मटके। इतवार को गिरजा में सातवे दिन जाकर तोवा करली और फिर वही रफ्तार जारी।' 'कूडा हम साफ करे और मोटी मोटी तनख्वाहे ये मारे।' 'हम हिन्दुस्थानी सिपाहियो की वारक देखो और इन के बंगले। हमारी रोटी, चपाती और दाल देखो और इनके अन्डे बिस्कुट। हमारी छोटी सी तनख्वाह देखो और इनका मुहरो का ढेर, जो रोज़ रोज़ विलायत चला जा रहा है।' 'और इस पर बदमाशो की 'डैमफूल'। तहज़ीब के साथ बात करना जानते ही नही। इनका मुल्क तो बिलकुल हब्शी है।' 'सबको तबाह कर दिया। झासी की देवी को देखो, किस मुसीबत में अपने दिन गुज़ार रही है।' 'मिया तुमने देवी सच कहा। एक दिन कमासिन टौरिया की तरफ घोडा दौडाये जा रही थी। मेरी आंखो में चकाचोध लग गई। जी चाहता था कि पैर छू लूं।' 'सच कहता हूँ डनलप सरीखे शेखीबाज़ो को तो वह एक तमाचे में ढीला करदे।'