झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
DevanagariHindipublished526 पृष्ठ
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लक्ष्मीबाई २४३ 'न जाने वह दिन कब आवेगा कि फिर रानी का झण्डा किले पर फहरावे ।' 'किले में गोरो की वसीगत देखकर मेरा तो खून जल उठता है ।' 'लोगो को किले में जाने की मनाही है ।' 'जब हमारा राज हो जावेगा, हम इन लोगो को किले की हवा के पास भी न फटकने देंगे ।' 'महीना, तारीख, वक्त कुछ मुकर्रर हुआ ?' 'चुप, चुप, अभी नही । ठहरे रहने का हुक्म है । इन्तज़ार करने का ।' 'अब तो सहा नही जाता । कब तक अपने धर्म और मजहव की तौहीन वरदास्त करते रहे ?'