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झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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लक्ष्मीबाई २४६ रानी—'मोतीबाई, अब तुम लोगो को ऐसे साधन काम में लाने पड़ेंगे, जिसमें छावनी में कोई भी उपद्रव उस दिन और उस समय तक न होने पाये।' • तात्या—'हर पल्टन के तीन-तीन अफसरो को इस तारीख और समय की सूचना कर दी जावे और उनको समझा दिया जावे कि तब तक सब प्रकार के अपमान चुपचाप सहते चले जावे । त्राण की घड़ी वही है और उनसे कह देना कि जब तक कमल का फूल छावनी में न आवे, किसी को भी तारीख और समय न बतलाया जावे और सिपाहियो को उत्तेजित होने से बरकाया जावे । कमल का फूल वैशाख से खिलने लगता है । प्रत्येक तालाब मे काफी मिलता है वह ठीक समय पर छावनी से छावनी घुमाया जावेगा । उसका आना समग्र सिपाहियो को कर्तव्य के लिये जाग्रत करना है और तारीख तथा ११ बजे के समय की सूचना देना है।' मोतीबाई—'मैं अच्छी तरह समझ गई।' रानी—'अब कहा जाओगे?' तात्या—'ग्वालियर । वहा से राजपूताने की ओर । एक चक्कर चैत के उपरान्त और लगेगा । नाना साहब तीर्थ-यात्रा के लिये निकलेंगे । उसी की आड में सब कार्यक्रम हर जगह बतला आवेंगे।

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