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झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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पृष्ठ 283

२७२ झाँसी की रानी [ ५३ ] कानपुर की सेना के जनरल व्हीलर ने किलेबन्दी की और उसके अन्दर अंग्रेजो को बाल बच्चो सहित ले गया । नाना ने व्हीलर को चेतावनी दी कि शाम तक आत्मसमर्पण कर दो वरना किले पर हमला किया जावेगा । व्हीलर ने नही माना । किलेबन्दी का मुहासिरा कर दिया गया और गोले बरसाए जाने लगे । व्हीलर भी खूब लडा । २१ दिन युद्ध हुआ । इलाहाबाद मे भी विप्लव हो गया था । वंगाल की ओर से जनरल नील फौज लेकर आया । उसने अत्यन्त निर्दयता के साथ मार्ग में पडते हुए ग्रामो को जलाया, अपराधी और निरपराधी ग्रामीणो की हत्यायें की । जब इलाहाबाद के विजन से घबराकर हिन्दुस्थानी पुरुष स्त्री और बालक नावो में बैठकर भागे उसके सैनिको ने गोलाबारी की और उनमें से अधिकाश को मार दिया । इतना अन्याय और ऐसा नरसहार किया कि सर्वत्र सनसनी, भय और क्रोध फैल गया । कानपुर मे भी नील और उसके सहयोगियो के नृशस कुकृत्यो के समाचार पहुंचे । आग-सी लग गई । हिन्दू मुसलमान स्त्रियो के भी कलेजे दहक उठे । अजीजन नाम की एक वेश्या घोडे पर सवार, तलवार बाधे शहर की गलियो और छावनी मे उत्तेजना और प्रोत्साहन देने के लिये दौड धूप करने लगी ! व्हीलर ने लखनऊ से सहायता मागी । लखनऊ खुद घिरी हुई थी । सहायता न आई । व्हीलर ने अपनी किले बन्दी पर सुलह का सफेद भडा गाड दिया । इसी समय इलाहाबाद के आसपास से नील की पलटन के वीभत्स- अत्याचारो के समाचार आए । हिन्दुस्थानी सेना क्रोध में और भी पागल हो गई । कानपुर की घिरी हुई अंग्रेज सेना ने आत्मसमर्पण कर दिया । उनको इलाहाबाद भेज देने के लिए ४० नावे तैयार करा दी गई । नाना अपने विठूर वाले महल में था । सिपाहियो ने गुस्से मे आकर अंग्रेज पुरुषो को