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झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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लक्ष्मीबाई २६५ सागरसिंह का गला रुद्ध हो गया । जिस मनुष्य ने एक दीर्घ समय डकैती और वटमारी में विताया था उसको जान पड़ा मेरे भीतर कुछ पवित्र भी है । हाथ जोड कर बोला, 'नही सरकार, कभी नही । यदि मेरा आधा नाम ही लिया जायगा तो बहुत है । मुझको क्षमा किया जाय ।' कुवर रघुनाथसिंह ने कहा, 'जब हम लोग पूरे कुवर की पदवी पर पहुँच जावेगे तव हमारा नाम आधा लिया जावेगा ।'