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झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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लक्ष्मीबाई ३०५ से लड रहे हैं। मेरी राजनीति को इस चिट्ठी से सहायता मिलेगी।' रानी बोली, 'परन्तु यह राजनीति चलेगी कितने दिनो ? हमारी अन्त में, सारे देश में स्वराज्य स्थापित करना है। यूनियन जैक झडे के नीचे स्वराज्य की स्थापना असंभव है। चिट्ठी चाहे जिसको मनमानी लिखो, परन्तु झडा तो चिट्ठी से बहुत बडा होता है।' 'सरकार,' भोपटकर ने कहा, चिट्ठी और झडे का सामञ्जस्य है। हम कुछ समय तक अपने आदर्श को ढका मुँदा रखना चाहते हैं। यदि स्वराज्य का प्रयत्न देश भर मे ३१ मई को एक साथ ही हो गया होता, तो राजनीति की दिशा कुछ और होती, परन्तु अब उसमे परिवर्तन आवश्यक है।' लालाभाऊ बख्शी बोला, 'सरकार देखने के दात कुछ और, खाने कुछ और। भोपटकर साहब का यही तात्पर्य है।' रानी मुस्कराईं। दरबारियो ने समझ लिया कि उन्होने कोई दृढ निश्चय कर लिया है। 'नाना की बात को मैं नही टाल सकती हू,' रानी ने कहा, 'परन्तु गेरुआ झडा सबसे ऊपर की बुर्ज पर रहेगा और अङ्गरेजो का झडा चाहे जहा, नीचे की बुर्ज पर लगा लो।' मन्त्रिमडल ने स्वीकार किया। रानी बोली, 'लालाभाऊ, तोपो का तुरन्त प्रबन्ध करो। जवाहरसिंह रघुनाथसिंह इत्यादि को सावधान करो। सब फाटक बन्द करके फाटको की बुर्जो पर गोला बारूद इसी समय जमा करो। नत्थेखा कई ओर से आक्रमण करेगा। किले पर बडी तोपें चढी हैं?' भाऊ ने उत्तर दिया, 'सरकार, केवल कडक बिजली नीचे रक्खी है। उसको अभी चढवाता हू और सरकार की अन्य आज्ञाओ का पालन करता हू। दीवान जवाहरसिंह यही हैं, परन्तु दीवान रघुनाथसिंह उनाव की ओर गये हुये हैं!' रानी - 'तुरन्त बुलाओ।'