झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
DevanagariHindipublished526 पृष्ठ
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३५० झांसी की रानी उनका अगुआ गुलमुहम्मद बोला, 'बाई जहां की औरत लडने को ऐसा तैयार है, वहा का मरद तो आसपास को चक्कर खिला देगा । और हम लोग—हम लोग—खुदाकसम—इस मुलक के लिये सब मर मिटेगा । वकत आने दो, बाई वक़्त !' पठानो ने दात मीसकर मन ही मन प्रण किया ।