झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३५६ झाँसी की रानी ललता ने स्वर में गाया, 'जननी जनम दियो है तोखो बस आजहि के लाने।' गीत की समाप्ति हुई कि गौस ने तोपखाने को पलीता छुलाया 'घनगरज और उसकी छोटी बहिनो' ने इतनी जोर की गरज की कि जिमीन काँप गई । दक्षिणी सिरे की सब बुर्जों से एक एक क्षण के बाद बाढ दगना शुरू हो गई । तोपो के भरने का उत्कृष्ट प्रबन्ध था । एक तोपखाने की बाढ और दूसरे की बाढ के दगने मे थोडा ही अन्तर पडता था । रोज के तोपखानो ने जवाब दिया, परन्तु जवाब कमजोर था । गौस के तोपखानो ने ऐसी मार बरसाई कि रोज़ का दम फूल उठा । उसका दक्षिणी दस्ता नष्ट भ्रष्ट हो गया । कुछ तोपखाने बन्द हो गये, परन्तु एक तोपखाना कोलाहल कर रहा था । समय लगभग दोपहर का हो गया था । गुलाम गौस ने कहा 'मुझे भूख लग रही है और गोरो का यह तोपखाना मानता नही। अच्छा देखता हूँ ।' गुलाम गौस ने 'घनगरज' को एक अंगुल इधर उधर सरकाया । निशाना बाधा और एक फटने वाला गोला छोडा । बारूदे इन तोपो की ऐसी थी कि धुश्रा न होता था, इसलिये गौस ने अपने निशाने की सफलता तुरन्त देखी । उछल कर बोला, 'वह मारा।' उसके साथियो ने देखा कि गोरे तोपची मारे गये और तोप भी उलट कर बेकार हो गई । अङ्गरेजो का दक्षिणी मीर्चा बिलकुल ठण्डा हो गया । गौस भोजन और आराम के लिये चला गया । लालता ने स्थान पकडा । पूर्व की ओर से अङ्गरेजी तोपो के गोले आने लगे । कुछ किले से टकराते थे और कुछ शहर में गिरकर घरो का और लोगो का नाश करते थे । भाऊ बख्शी ने कडकबिजली का स्थान ज़रासा परिवर्तित किया और निशाना साधकर पलीता दिया । थोडी देर में रोज का पूर्वीय मोर्चा भी ठंडा हो गया । तोपची मारे गये और तोपे बेकार हो गईं । बख्शी अपनी पत्नी को तोपखाना सौप कर भोजन और आराम के लिये चला गया ।