भारतकोश
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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लक्ष्मी बाई ३५६ रोज़— किले में से जो गोलाबारी हुई,उसका प्रधान नायक कौन है ?' पीरअली—'गुलाम गौसखा और भाऊ बख्शी ।' रोज़ ने बागियो का रजिस्टर लोटवाया, पलटवाया । उसमें ये नाम न थे । रोज़—'ये लोग कौन है ?' पीरअली—'रानी साहब के नौकर हैं ।' रोज़—'ओर्च्छा फाटक और सैयर फाटक पर कौन हैं ?' पीरअली—'दीवान दूल्हाजू ओर्च्छा फाटक पर है और कुंवर खुदाबख्श सैयर फाटक पर ।' फिर रजिस्टर देखा गया । ये नाम भी न निकले । रोज़—'कोई लालता ब्राह्मण है ?' पीरअली—'है, किले में है ।' रोज़ ने दात पीसे । बोला, 'जनरल कौन है ?' पीरअली—'खुद रानी साहब । उनके नीचे दीवान जवाहरसिंह जागीरदार काम करते हैं ।' रोज़—'कुल कितने गोलन्दाज हैं ?' पीरअली—'बेहिसाब । सैकड़ो । बहुत तो औरतें गोलन्दाज हैं ।' रोज़—'बाई जोव ! स्टुअर्ट, यह भासी तो महज नरक (हैल) है । औरते गोलन्दाज ! कल दूरवीन से अच्छी तरह देखूँगा ।' स्टुअर्ट—'बारूद बनाने का कोई कारखाना है या पहले से बनी रक्खी हैं ?' पीरअली—'पहले की बनी रक्खी है और बनाने का कारखाना भी है ।' 'रोज़—'इट इज स्मोक लैस पाउडर स्टुअर्ट ( धुआँ न देने वाली बारूद है ! ) उत्तरी दरवाजे किसके सुपुर्द हैं ?'