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झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

पृष्ठ 371, कुल 526 में से

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३६० , झांसी की रानी पीरअली—ठाकुरो, काछियो और कोरियो के हाथ में। दतिया- फाटक तेलियो के हाथ में है।' रोज़—'दी होल पीपुल एगेन्स्ट अस (पूरी जनता हमारे खिलाफ है) अच्छा तुम किस जगह काम करते हो ?' पीरअली —'सागर खिडकी पर।' रोज़—'हमारे हवाले कर सकोगे !' पीरअली—'खुशी से, मगर आपको फायदा कुछ न होगा। सागर खिडकी की ठीक पीठ पर खजाञ्ची की कोठी है। उस पर तोपखाना है। वह मेरे काबू का नही है। वहां पठान और ठाकुर हैं।' रोज़—'कोई औरतें हाथ में आ सकती है ?' पीरअली—'तोबा, तोबा झासी की औरतें पूरी शैतान हैं। एक नाचने गाने वाली मेरी जान पहिचान की है, मगर वह जासूसी मुहकमें की प्रधान है और अब तोप चलाती है।' रोज़—'डैन्सिंग गर्ल ए गनर ! (नाचने वाली गोलन्दाज !) व्हाट एल्स हैव आई टु हियर इन दिस डैम्ड् एकर्सैड प्लेस (इस सत्यानासी पलीत जगह में मुझको अब और क्या सुनना बाकी रह गया है ?)। स्टुअर्ट—'मगर जासूसी मुहकमें का अफ़सर तो एक मोतीसाईं सुना गया था ?' पीरअली—'जी नही वह अफ़सर यही नाचने वाली है और उसका नाम मोतीबाई है।' वे सब हँस पडे। रोज़ ने कहा, 'वी हैव मैड फूल्स् आव अस ! (हम लोग वेवकूफ बन गये । ) अच्छा, किसी एक फाटक वाले से हमको मिलादो। तुमको और उसको बहुत इनाम मिलेगा।' पीरअली —'कोशिश करूंगा।' रोज़— तुम बतला सकते हो शहर और किले पर हमरी तोप का गोला कहा से अच्छा पड़ेगा ?'

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