झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंलक्ष्मीबाई ३६६ पीरअली ने तुरन्त कहा, 'देखो मेरे पता लगाने के कारण गोलन्दाजो को कितना लाभ हुआ।' बरहामुद्दीन को शक हुआ। उसको दबाकर बोला, 'बेशक हुआ होगा, मगर किले में गोलन्दाजी नही कर रहा था, इसलिये कुछ कह नही सकता।' पीरअली ने शेखी मारी, 'हमारी खिडकी के सामने अङ्गरेजो का कोई मोर्चा नहीं पडता नही तो दात खट्टे कर देता।' बरहामुद्दीन ने खुशामद की, 'मीरसाहब कहिये दात और सिर तोड देते।' पीरअली ने प्रसन्न होकर कहा, 'एक ही बात है।' जब कुछ रात बीत गई पीरअली ने बरहामुद्दीन से धीरे से कहा, 'अब मै जासूसी पर जाता हूँ आप यहाँ होशियार रहना।' बरहाम ने मंजूर किया। पीरअली मुहरी के रास्ते से बाहर हो गया। और उसके पीछे पीछे चुपचाप बरहाम। आध मील चलने के बाद जब पहले छबीने के संत्री ने टोका तब पीरअली ने सकेत शब्द में उत्तर दिया। पीरअली आराम के साथ अङ्गरेज छावनी में दाखिल हो गया। बरहाम बहुत उदास धीरे २ सागर-खिडकी को लौट आया। जब पीरअली लौटा बरहाम ने प्रश्न किया, 'आज की क्या खबर लाये मीरसाहब?' उसने उत्तर दिया, 'ज्यादा पता नही लगा। सिर्फ इतना मालूम कर सका कि कल शहर पर गोलाबारी पश्चिम की तरफ से होगी।' 'आज तो सरदार गुलाम गौस ने कमाल कर दिया। जिधर की तोप संभाली उसी तरफ कहर बरसा दिया।' 'हमारी बारूद भी बहुत अच्छी है। धुआँ होता ही नही। अङ्गरेजो को पता नही लगता कि तोपखाने किधर लगे हुये हैं।'