भारतकोश
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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लक्ष्मीबाई ४१३ [ ७६ ] गोरो ने शहर के सब फाटको पर अपना प्रबन्ध कर लिया, उनको अपने उन निशशस्त्र पुरुषो, स्त्रियो और बच्चो के खून का बदला लेना था, जिनको बख्शिशअली इत्यादि बहुत थोडे से हिन्दुस्थानियो ने मारा था । पाच वर्ष की आयु से अस्सी वर्ष तक के जितने पुरुष मिले उनका कतल शुरू कर दिया । हलवाई पुरा में आग लगादी । कुछ स्त्रिया अपने सतीत्व के नष्ट होने के भय से कुओ में गिरकर मर गई । रोज का आदेश था कि स्त्रियो को न मारा जाय, उनको जान बूझ कर गोरो ने नही मारा । लेकिन अपने पति की रक्षा के लिये जो स्त्रिया उनकी आड बनने के लिये आ गई वे गोलियो से मरी । झाँसी के कवि और गायक भी लडे थे, वे मारे गये या घायल हुये । गवँयो मे केवल मुगलखा बचा और नर्तकियो मे दुर्गा और एक और । गोरो ने घर घर में घुसना और सोना चांदी इत्यादि सामान लूटना शुरू किया । शहर वाले राज महल के चारो ओर अङ्गरेजी सेना का सबसे अधिक उपद्रव हुआ । नाटकशाला के सामने दक्षिण की ओर रानी का अस्तबल था । उस अस्तबल को रानी के बुन्देलखण्डो सिपाहियो ने किले की लढ़ाई में परिवर्तित कर दिया । थे लगभग कुल पचास ही । परन्तु जब तक एक भी जिन्दा रहा अङ्गरेजो ने अस्तबल पर कब्जा नही कर पाया । एक एक दीवार, एक एक कोठरी, एक एक ईट पर कब्जा करने में अङ्गरेजो को न जाने कितने सिपाही बलिदान करने पडे । इसके बाद महल की एक एक इञ्च भूमि के लिये युद्ध हुआ । जब महल के सब सिपाही खतम हो गये उस पर भी कब्जा हो गया । सब सामान लूटा । एक बक्स में से यूनियन जैक झण्डा मिला, जिसे लार्ड विलियम बेंटिक ने रामचन्द्रराव को दिया था महल के सिरे पर वह झडा लगा दिया गया । महल के केवल उस भाग को छोडकर, जिस पर यूनियन जैक फहरा रहा था, बाकी महल में आग लगादी गई । नाटक-