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झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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लक्ष्मीबाई ४२७ रोज़ ने सिर हिलाकर कहा, 'नो स्टुअर्ट । इफ़ वन परसेट आव इण्डियन वीमन बिकम सो मैड एज़ दिस गर्ल इज वी विल हैव टु लीव आल दैट वी हैव इन दिस कंट्री । (न स्टुअर्ट, यदि भारतीय स्त्रियो में एक प्रतिशत भी ऐसी पागल हो जाये जैसी यह स्त्री है तो हमको हिन्दुस्थान में अपना सब कुछ छोडकर चला जाना पडेगा ।' ) स्टुअर्ट की समझ में आया । रोज़ ने समझाया, 'यह स्त्री हम लोगो को अपने धोखे में उलझाकर रानी के भाग निकलने का समय पाने के लिये यह प्रपञ्च रचकर आई है, परन्तु बोकर पीछे पीछे गया है । आशा है कि वह इस धोखे से बच गया होगा ।' जनरल रोज़ ने झलकारी को तग नही किया । केवल कंद में डाल दिया और एक सप्ताह उपरान्त छोड दिया ।