झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४३० झाँसी की रानी फिर उन्होने स्नान किया। कपडे बदले और केवल शर्बत पीकर सो गयी। इधर उस दिन झासी में जो कुछ हुआ वह एक अत्यन्त वीभत्स काड है। इङ्गलेड के माथे का अमिट कलक। झासी उसको कभी न भूली। किले पर अधिकार करने के बाद असख्य मकान जलाये गये। बालक, युवा, वृद्ध गोलियो से उडाये गये। बेहद लूटमार की गई। लाशो के ढेर लग गये। गाये और बछडे अनाथ होकर भटकने और जलने लगे। सात दिन तक लाशे सडती रही। लगभग तीन सहस्त्र निरपराध व्यक्तियो का वध किया गया। महालक्ष्मी का मन्दिर लूटा गया। अंग्रेजी सेना के नायको और ऊँचे अफसरो तक ने एक अत्यन्त बर्बर कृत्य में भाग लिया। शेक्सपियर, मिल्टन, स्कॉट और बर्क के देश के शिक्षित तथा विज्ञान विदग्ध अफसरो ने, मन्दिरो की मूर्तिया, सिंहासनो पर से उठाईं, झोली मे रक्खी और अपने शराबखानो को सजाने के लिये सदा के लिये ले गये और इस कुकृत्य को अंग्रेज़ इतिहास लेखक ने इस प्रकार प्रकट किया, 'मूर्तियो का चुराना 'लूट' नही थी, यह तो कुतूहल जनित जिज्ञासा की पूर्ति मात्र थी?' मुरलीमनोहर के मन्दिर की मूर्ति बचा दी तो बुड्ढे पुजारी को मन्दिर के भीतर ही मार डाला। उसके जवान लड़के को पकड़कर मन्दिर के बाहर लाये। एक गोली चली। फिर उसकी बुड्ढी मा को, कभी पता नही चला कि लडका कहा गया। * पहले दिन अंग्रेजो ने लूटमार की। दूसरे दिन मद्रासी दस्ते को अवसर दिया गया। तीसरे दिन निज़ाम हैदराबाद की पल्टन की बारी आई। अनाज, बर्तन, कपडे तक न छोडे गये।
- वृद्ध पुजारी का नाम रामचन्द्र गोलवलकर और लड़के का नाम कृष्णाराव था।