झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४४० झांसो की रानी जूही ने भर्राये हुये स्वर में उसास लेकर उत्तर दिया, 'सरदार साहब आये थे।' रानी—'कौन सरदार साहब ? यहा तो मुझको सब सरदार ही दिखते हैं। ससार की किसी भी सेना की ऐसी अस्त-व्यस्त स्थिति न होगी जो मुझको इस सेना की दिखलाई पड रही है।' कोई भी एक ऐसा नही जिसकी सब कोई माने।' जूही—'सरदार तात्या साहब आये थे।' रानी—'क्या कहते थे ?' जूही—'कहते थे कि श्रीमन्त रावसाहब पेशवा नृत्यगान के लिये बुला रहे हैं। महफिल बादा, बानपूर और शाहगढ के रईसो की है।' रानी—'हाँ ! यह मौज ! तूने क्या उत्तर दिया ?' जूही—'मैने कह दिया सरदार कि मै रानी साहब की कर्नल हूँ, नाचने गाने वाली नही।' रानी—'जूही तूने अपने योग्य ही उत्तर दिया। दो एक दिन में ही कोच में लडाई होने वाली है। और इन लोगों का यह हाल है ! जी चाहता है कि इसी समय इनको कुछ खरी खोटी सुनाऊँ, परन्तु अवसर उपयुक्त नही है। किसी समय कहना अवश्य पडेगा। और कुछ•••दण्ड•••