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झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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पृष्ठ 455

४४२ झाँसी की रानी . रावसाहब ने कोच की हार का किसी पर भी दोषारोपण नही किया और बचकर निकल आने के चातुर्य पर प्रशंसा बरसाई। इसके उपरान्त आगे की योजना की बात छिड़ी। रानी अपने आसन से उठी। कमर से तलवार निकाल कर पेशवा के सामने मूठ की ओर से रखदी और आसन पर बैठ कर बोली, 'आप के पूर्वजो ने यह तलवार हम लोगो को दी थी। भगवान की दया से मेरे पूर्वजो ने और मैने भी इसका उचित उपयोग किया। परन्तु अब आप की कृपा से यह तलवार वञ्चित हो गई है इसलिये इसे वापिस लीजिये।' दरबार में उपस्थित सब सरदार स्तम्भित रह गये। रावसाहब ने कहा, 'आपके पुरखो ने और आपने स्वराज्य की स्थापना के लिये जो कुछ किया है वह चिरस्मरणीय है। आपने झाँसी में अङ्गरेज़ो का जैसा करारा मुकाबला किया वह अवर्णनीय है। कोच से हमारी सेना और युद्ध सामग्री को बचाकर ले आने मे आपका बहुत बडा हिस्सा है। आप सरीखा निपुण सेनापति शायद ही कोई हो। आप जो, योजना बतलावे हम लोग शिरोधार्य करेगे। आप इन सब रणशूर रईसो को अपना सहयोग देने की कृपा कीजिये और अपने स्वराज्य के प्रण का स्मरण करिये।' रानी बोली, 'कोच की लडाई में आपका प्रबन्ध बहुत रद्दी था। सेना में कोई व्यवस्था नही है। अङ्गरेजी सेना अपनी अच्छी व्यवस्था के कारण ही विजय प्राप्त करती है। •हमारे सैनिक शूरवीरी और पराक्रम में अङ्गरेजो से बडे चढे हैं, परन्तु व्यवस्था और दूरदर्शी योजना की कमी के कारण उनका शौर्य विफल हो जाता है। झासी की सहायता के लिये आपकी इतनी बड़ी सेना आई, परन्तु अव्यवस्था के कारण हार खाकर, लौट गई। जब तक आप अपनी सेना का अच्छा प्रबन्ध नही करेंगे और संयम से काम न लेंगे, युद्ध में यश प्राप्त न होगा। अव्यवस्था का कारण है एक व्यक्ति को मुख्याधिकारी न मानना और अपनी अपनी मनचाही योजना को काम में लाना तथा समय को व्यर्थ बातो में नष्ट करना।'