झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
DevanagariHindipublished526 पृष्ठ
पृष्ठ 456, कुल 526 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 456
लक्ष्मीबाई ४४३ रावसाहब तलवार को लेकर उठा । रानी के सामने विनम्र भाव से खडा हुआ । 'आप कृपापूर्वक तलवार ग्रहण करे,' रावसाहब ने कहा, 'आपकी सम्मति बिलकुल उचित है और मानी जायगी ।' रानी ने तलवार ले ली और म्यान मे डाल ली । उपस्थित सरदारो ने रावसाहब को प्रधान सेनापति नियुक्त किया । उसने स्वीकृत कर लिया । सरदारो ने रानी को प्रधान सेनापति न बना- कर इतिहास में अपनी पराजय पेशगी लिख दी । परन्तु योजना बनाने के लिये रानी से अनुरोध किया । रानी ने योजना बतलाई । उसके अनु- सार मोर्चे बनाये गये । तोपें रक्खी गईं । गोलन्दाज नियुक्त और सरदार विभक्त किये गये । रानी को लालकुर्ती वाले ढाई सौ सवार दिये गये और वाम पार्श्व की रक्षा का भार ।