झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
पृष्ठ 460, कुल 526 में से
संदर्भ में पढ़ेंलक्ष्मीबाई ४४७ बखतवली को अङ्गरेज़ो ने कैद करके लाहौर भेज दिया । मर्दनसिंह भी कैद हो गया । रोज़ को कालपी में पेशवा की बहुत बहुमूल्य युद्ध सामग्री मिली । पन्द्रह तोपे, सातसौ मन बारूद, असंख्य बन्दूक और तलवारें और नये तर्ज़ के हथियार ढालने-बनाने की विलायती मशीने हाथ लगी । रोज़ को यह विजय चौबीस मई के दिन मिली । यही दिवस विक्टोरिया के जन्म का था । इसलिये अङ्गरेज़ो ने धूमधाम के साथ कालपी पर अपना झण्डा चढ़ाया और कतल तथा लूट से पाई हुई शकर के प्रमाद से जश्न मनाये । और तीन दिन कालपी को मुस्तैदी के साथ लूटा । जनरल रोज़ ने नर्मदा के उत्तर भाग को कालपी तक अपने अधीन कर लिया । नर्मदा के उत्तरपूर्वीय भाग को दबाता हुआ करवी, महोबा, वादा इत्यादि को लूटता-कुचलता विटलाक रोज़ से कालपी में आ मिला । राजपूताने की ओर से कर्नल स्मिथ अपनी सेना लिये हुये आगरा, ग्वालियर की दिशा में आ रहा था । 'बलवाइयो' के पकड़े जाने के लिये गाव गाव में इनामी इसतहार बांटे जा रहे थे । रावसाहब के पास रईस और सरदार काफी थे, परन्तु सेना बहुत कम थी । तोपें नही थी, सामान नही बचा था । और व्यवस्था तो कभी भी न थी । दिन भर लू चली । रात को भी काफी गरम हवा चल रही थी तारे धूल की पतली चादर से ढके हुये थे । गोपालपुरा के एक बगीचे में रावसाहब, तात्या, वादा के नवाव इत्यादि आगे की योजना के आकार- प्रकार बना-विगाड रहे थे । रात अन्धेरी थी । पास में कोई उजाला न था । इसलिये किसके चेहरे पर क्या गुज़र रही थी, कोई नही देख सकता था । रानी लक्ष्मीबाई अपने शिविर में थी । उस दरबार में न थी । रावसाहब ने कहा, 'किसी प्रकार नागपूर की ओर पहुच पावें तो शीघ्र सैन्य संग्रह हो । इन्दौर की छावनी से भी सहायता मिले ।'