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झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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४५६ झांसी की रानी

'गुलमुहम्मद बात करने में जैसा लट्ठ जान पड़ता है वैसा वास्तव में नहीं है। वह चतुर और वीर दल नायक है। वैसे ही देशमुख और रघुनाथसिंह हैं।' 'हाँ सरकार।' 'एक बात बतला सुन्दर।' 'आज्ञा सरकार।' 'तू संसार में सबसे अधिक किसको चाहती है। सच सच कहना।' 'सच कहती हूँ। भगवान जानते हैं—मैं आपको सबसे अधिक चाहती हूँ।' 'मेरे उपरान्त किसको?' सुन्दर ने उनके पैर पकड़ लिये। सिर नीचा कर लिया। 'और कौन है सरकार?' 'नाम बतलाऊँ?' 'नहीं।' 'सुन्दर, तू विवाह करना।' 'जब सरकार स्वराज्य स्थापित कर चुकेगी तब।' 'स्वराज्य तो देर सबेर स्थापित होगा ही। तू विवाह के लिये क्यो रुके?' 'वह जीवन का मुख्य कार्य नहीं है।' 'यह तेरी इच्छा पर निर्भर है, परन्तु मेरी अनुमति है। 'असम्भव सरकार। मेरा प्रण है।' 'जूही ने भी प्रण किया है। उस पर मुझको दया आती है।' 'उसने मरणपर्यन्त कौमार्य व्रत का प्रण किया है।' 'असम्भव नहीं है।' 'मैं सरकार से एक बात पूछना चाहती हूँ।' 'पूछ।' 'जितनी निर्भय आप हैं, क्या कोई और भी हो सकता है?'