झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
DevanagariHindipublished526 पृष्ठ
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लक्ष्मीबाई ४५७ ‘अवश्य । कुछ कठिन नही ।’ ‘सो कैसे ?’ ‘सहज ही । काफी शारीरिक श्रम कर, सहज ही ध्यान और विश्वास से सहज हो जायगा । मुन्दर गद्गद् हो गई । कुछ क्षण चुप रहने के बाद यकायक बोली, ‘बाई साहब, मे आपके समक्ष मर जाऊँ, तो मुझे बडा सुख होगा । मोतीबाई की सी मृत्यु की श्राराधना करती हू ।’ ‘जो बात मैने बतलाई वह इससे कही बढकर है ।’