झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
DevanagariHindipublished526 पृष्ठ
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लक्ष्मीबाई ४६७ ग्वालियर का पतन हो गया और राजा तथा दिनकरराव आगरा भाग गये । सन्नाटे में आ गया । कालपी की इतनी बडी और बुरी पराजय के उपरान्त भी ग्वालियर हस्तगत करने का विचार और साहस कौन कर सकता था ? कौन इतना बडा मन्सूबा गाठ सकता था ? किसमें इतना बडा हौसला था ? रोज़ ने सोचा, 'झाँसी की रानी के सिवाय और कोई नही हो सकता । जब तक रानी को नही पकडा या मारा तब तक हिन्दुस्थान में हमारे राज्य की खैरियत नही ।' दृढ़ता के साथ रोज़ अपने काम में जुट गया ।