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झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

पृष्ठ 491, कुल 526 में से

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पृष्ठ 491

४७८ झांसी की रानी से शहर पर होना था, पूर्व दिशा से, जहां लक्ष्मीबाई का मोर्चा था। जैसे ही अंग्रेजी सेना रानी की तोपो की मार के भीतर आई, रानी ने गोलन्दाजो को सकेत दिया । गोलाबारी होते ही अंग्रेज़ी सेना की दुर्गति हुई और वह पीछे हटी । रानी के लालकुर्ती सवारो ने तुरन्त छापा मारा । स्मिथ ने एक चतुर चाल खेली—उसने अपनी उस टुकडी को और अधिक पीछे खीचा और रानी के सवारो को आगे बढने दिया । इन सवारो के ज्यादा आगे निकल जाने से उनका स्थान खाली हो गया । स्मिथ ने कई दिशाओ से रानी के मोर्चों पर आक्रमण किया । घमासान युद्ध हुआ। तलवार चली । लोहे ने लोहे से चिनगारिया छुटकाई । स्मिथ ने रानी के पार्श्व पर अपनी दो पल्टने और फेकी जो अभी तक चुपचाप खडी थी । रानी के सवारो को पीछे हटना पडा । ब्रिगेडियर स्मिथ ने अपने सामने की पातो को फोड कर रिसाले समेत बढने का सकल्प किया । उद्देश्य था फूल बाग पर अधिकार करने का । अपने सवारो को पीछे हटता देख कर रानी घोडे को तेज करके तुरन्त उनके समीप पहुची । गुलमुहम्मद दिखलाई दिया । उसके पास घोडा दौडा कर बढते हुये अंग्रेजो की ओर तलवार की नोक करके बोली, 'खान, आज हाथ ढीला क्यो पड रहा ?' गुलमुहम्मद चिल्लाकर बोला, 'हुजूर हमारा हाथ अब मुलाहिजा करे।' पठान सरदार चिल्लाता हुआ, रेलपेल करता हुआ, लालकुर्तियो को बढावा देता हुआ, आगे फिका । रानी साथ में । गुलमुहम्मद ने प्रखर स्वर मे रानी से प्रार्थना की, हुजूर जूही सरदार का तोपखाना ठीक करे ।' रानी लौट पडी । एक टौरिया के पीछे जूही तोपखाना की मार को जारी किये थी, परन्तु लालकुर्ती को पीछे हटा देख कर हडबडा गई थी । गोरा रिसाला उसकी ओर बढ रहा था । 'जूही,' रानी ने आदेश किया, 'तोप का मुहरा एक अंगुल नीचा कर।'

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