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झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

पृष्ठ 494, कुल 526 में से

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पृष्ठ 494

लक्ष्मी बाई ४८१ रानी ने कहा, 'कुंवर गुलमुहम्मद, आज तुमको अपने जौहर का जौहर दिखलाना है । कल की लडाई का हाल देखकर आज जीत की आशा होती है । परन्तु यदि पश्चिम या उत्तर का मोर्चा उखड जाय तो उसको सँभालना और दक्षिण चल पडने की तैयारी में रहना ।' 'सरकार,' गुलमुहम्मद बोला, 'अम सब पठान आज कट जाने का कसम खाया है । जो बचेगा वो दखन जायगा । आप दखन जाना सरकार । अमारा राहतगढ लेना । अमारा भौत पठान वहा मारा गया । उनका यादगार बनवाना ।' 'नही कुवर साहब हम जीतेगे', रानी ने कहा, 'दक्षिण जाने की बात तो तब उठेगी जब यहा कुछ हाथ न रहे । फौजदार के विचार में जीतने की बात पहले उठनी ही चाहिये, परन्तु दूसरी बात जो तै की जावे वह बच निकलने और फिर कही जमकर युद्ध करने की है ।' मुन्दर बोली, 'सरकार कुछ जलपान करले । इसी समय से हवा में कुछ कुछ गरमी है । दिखता है लू बहुत चलेगी ।' रानी ने कहा, 'तुम लोग कुछ खालो । दामोदरराव को खूब खिला- पिला लो । पीठ पर पानी का प्रबन्ध रखना । मैं केवल शर्बत पियूंगी ।' जूही — 'मै भी शर्बत पियूगी ।' रानी — 'देशमुख, तुम ?' देशमुख — 'मै तो कुछ खा-पी आया ।' रानी — 'रघुनाथसिंह ?' रघुनाथसिंह — 'मै कुछ खाऊँगा ।' रानी — 'तुम और मुन्दर कुछ खा-पीकर झटपट शर्बत बना लाओ ।' मुन्दर और रघुनाथसिंह गये । दामोदरराव आ गया । रानी ने उसको खिलाया-पिलाया । रानी ने जूही से कहा, 'आज तेरी सुगन्ध ऐसी बरसे कि बैरी बिछ जायें ।'

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