झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
DevanagariHindipublished526 पृष्ठ
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४८२ झाँसी की रानी जूही प्रसन्न होकर बोली, 'आज मैं जो कुछ कर सकूँ, कह नही सकती, परन्तु आँख खुलते ही जो कुछ प्रण किया है उसके अनुसार अवश्य काम करूँगी।' रानी--'परन्तु जो कुछ करे, ठडक के साथ करना। केवल उत्तेजना से बहुत सहायता नही मिलेगी।' जूही--'तभी तो सरकार मै हँस रही हूँ। एक हसरत मन में रही जाती है—आपको गाना न सुना पाया।' रानी--'किसी दिन सुनूँगी।' जूही—'हाँ सरकार, अवश्य।' जूही जरा ज्यादा हँस पड़ी। रानी—'तेरी हँसी आज कुछ भीषण है।' जूही—'काम इससे अधिक भीषण होगा सरकार।'