भारतकोश
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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५०३ झांसी की रानी बडे बडे असराफ गरद कर ऐसौ कलजुग आला विभचारिन बिस्वन के उर में वर मुक्तन की माला भन हृदेश पण्डित गुनमण्डित ते धारे मृगछाला गानतान वारे धनवारे ओढे फिरे दुसाला ।१। महाबीर वीरन के बेटा बैठे गहे किनाला खसिया भँडुआ राड मिलावे बाधे फिरे तिपाला कीमखाब के पैरन वारे भोगे अन्न कसाला घोडिन की खिजमित कर तिनके परे कानमें बाला ।२। पतिव्रता लरकन को तरसे बिभचारिन घर लाला झूठे के मुख लाली देखी साचे के मुख काला सत्य बचन परमान चलन को परे दुष्ट के जाला चुगलखोर धानचोर मसखरा परे सेज सुखसाला ।३। देवमदिरिन दिया न बाती गोरन पै उजियाला भूमदेव विप्रन के देखो कोडी देत कसाला रडिन को भोजन को सिन्नी ऊपर पान मसाला साधुन को नहि चून चनन कौ सेवे देव दिवाला ।४। चतुर नरन को बदसूरत की कूरन के घर बाला मूरख बैठे मौज उडावे परबीनन पग छाला भूपत कृपा करत नीचन पै कर अनीति प्रतिपाला जबर जोर कलिकाल काल कौ गुन कौ चलै न चाला ।५। मुसलमान सीतापति सुमरे हिन्दू मुख हकताला मुसलमान मौसी कर टेरे हिन्दू टेरैं खाला साची कहे सुनै को बिनती भयो नीच बल वाला अधरम प्रगट भयो भूतल पै धसगो धरम पताला ।६। जगतगुरू विप्रन को निन्दत बेनिक पुत्र घर वाला मुछमुण्डन की दच्छा लै लै फेरे तुलसीमाला ।७।