भारतकोश
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

पृष्ठ 54, कुल 526 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 54

लक्ष्मीबाई ४३

उनके एक क्षुब्ध विरोधी ने सब दलीलो का एक जवाब देते हुये तडाक से कहा, 'नारायण शास्त्री जिसकी तुम बार बार दुहाई देते हो, ब्राह्मण ही नही है ।' पजनेश ने अधिकतर क्षुब्ध स्वर मे पूछा, 'क्यो नही है ?' उत्तर मिला, 'वह एक भगिन को रखे हुये है ।' यह अपवाद खुसफुस के रूप मे फैला । परन्तु धीरे धीरे । कुछ कट्टर पंथियो ने इसको अपना लिया और कुछ ने असम्भव कह कर अस्वीकृत कर दिया । पजनेश ने सोचा, 'मैं स्वयं निर्धार करूँगा ।' नारायण शास्त्री ने भी अपनी बदनामी सुन ली ।