झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा
DevanagariHindipublished526 पृष्ठ
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लक्ष्मीबाई ८१ रानी ने तुरन्त उत्तर दिया, 'इन दिनो अब इससे अधिक और हो ही क्या सकता है ? राज्य का काम चलाने के लिये दीवान हैं । डाकुओ का दमन करने और प्रजा को ठीक पथ पर चालू रखने के लिये अँगरेजी सेना है ही । इस पर भी यदि कोई गलती हो गई तो कम्पनी के एजेन्ट की खुशामद कर ली । बस सब काम ज्यो का त्यो मनमाना चलता रहा ।' रानी मुस्कराने लगी । इस बात मे रानी की विलक्षण बुद्धि का आभास पाकर राजा को जरा विस्मय हुआ और उनके होठो पर बरबस हँसी आई ।