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झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)

Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography

वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध द्वारा

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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पृष्ठ 97

८६ झांसी की रानी उसने घिघियाकर उत्तर दिया, 'श्रीमन्त सरकार में भूल गया । मुझको याद नही रहा ।' 'तू यह भूल गया कि मे उसको देश-निकाला दे चुका हूं ?' राजा ने कड़क कर कहा । प्रहरी अत्यन्त विनीत भाव से बोला, 'इस बात को श्रीमन्त सरकार बहुत दिन हो गये इसलिये मुझको सुध नही रही । और सरकार ने उस दिन तीर्थ यात्रा से लौटने की खुशी में बहुत लोगो को माफी बख्शी सो मैने सोचा कि खुदाबख्श को भी माफी मिल गई होगी ।' इस उत्तर से राजा का क्रोध घटा नही, जरा और बढ गया । रोते हुये प्रहरी को सजा दी गई विच्छू से डसवाने की । गंगाधरराव ने एक विशेष वर्ग के अपराधो के लिये विच्छू से कटवाने का विधान कर रक्खा था । कुट्ठे में पैरो का डालना भाजना एक साधारण बात थी । गहन अपराधो में हाथ पाव कटवा डालने की जनसम्मत प्रथा जारी थी । परन्तु दवे दवे और थोडी थोडी । दहकते अगारो से डाकुओ के अग जलवाना इस विधान में शामिल था, परन्तु विच्छुओ से कटवाना जन-वृत्ति की सहन-शक्ति से बाहर हो गया था । विच्छू से कई जगह काटे जाने के कारण प्रहरी बेहद सन्तप्त हुआ अन्त में बेहोग हो गया । राजा समझे मर गया तब उनका क्रोध ठंडा पडा । प्रहरी वहा से हटवा दिया गया ।